039मैंने अनीति-अन्याय-अधर्म के खिलाफ धर्मयुद्ध का संकल्प लिया है उसे पूर...


038 मैनें विश्व अध्यात्म जगत को चुनौती धर्मरक्षा के लिये दी है अहंकारवश ...


036 भविष्यकाल व भूतकाल को भूलकर मात्र वर्तमान में जीवन जीना प्रारम्भ करो...


035 हमारे समाज में ऐसी तीन धारायें, जो सबके हित एवं लाभ के लिये कार्य कर...


034 मात्र साधक बनकरही हम समाज में मानवता की स्थापना व रक्षा कर सकते हैं ...


032 आत्मा का आज तक कोई पार नहीं पाया है और ना ही पा सकेगा Shri Shaktiput...


031 क्या आप जानते है ’मैं‘ शब्द में ही सब कुछ सार छिपा है Shri Shaktiput...


030 मानवीय मूल्यों की स्थापना करना ही सभी लक्ष्यों को प्राप्त करने का मा...


027 रामायण व गीता दिन-रात पाठ करने के बजाय उनमें लिखी बातों पर अमल करो S...


026 सत्य को तलाशा जाए तो सत्य हर काल में होता है, धैर्य और धर्म का महत्व...


024 धर्मरक्षा के लिए एक बार धार्मिक सम्मेलन अवश्य होना चाहिए Shri Shakti...


023आज कथावाचक, योगाचार्य व धर्माचार्य समाज को लूटकर धन के अम्बार खड़े कर ...


022 विश्व की एकमात्र पूर्ण आध्यात्मिक पत्रिका है सिद्धाश्रम पत्रिका Shri...


019 प्रकृति की किसी भी कृति को नष्ट नही किया जा सकता Shri Shaktiputra Ji